१०० कौरव बंधूंची नावे

 १०० कौरव बंधूंची नावे

 महाभारत आदिपर्वाच्या १०८व्या अध्यायात श्लोक २-१४ येथे दिली आहेत ती अशी आहेत.

(प्रत्येक श्लोकाअखेर त्यातील नावे सुटी करून मराठीमध्ये दिली आहेत आणि त्या नावांची गणती दाखविली आहे.)

दुर्योधनो युयुत्सुश्च राजन्दुःशासनस्तथा ।
दुःसहो दुःशलश्चैव जलसन्धः समः सहः ॥ २॥
दुर्योधन, युयुत्सु, दु:शासन, दु:सह, दु:शल, जलसन्ध, सम, सह (१-८)
विन्दानुविन्दौ दुर्धर्षः सुबाहुर्दुष्प्रधर्षणः ।
दुर्मर्षणो दुर्मुखश्च दुष्कर्णः कर्ण एव च ॥ ३॥
विन्द, अनुविन्द, दुर्धर्ष, सुबाहु, दुष्प्रधर्षण, दुर्मर्षण, दुर्मुख, दुष्कर्ण, कर्ण (९-१७)
विविंशतिर्विकर्णश्च जलसन्धः सुलोचनः ।
चित्रोपचित्रौ चित्राक्षश्चारुचित्रः शरासनः ॥ ४॥
विविंशति, विकर्ण, जलसन्ध, सुलोचन. चित्र, उपचित्र, चित्राक्ष, चारुचित्र, शरासन (१८-२६)
दुर्मदो दुष्प्रगाहश्च विवित्सुर्विकटानन: ।
ऊर्णनाभः सुनाभश्च तथा नन्दोपनन्दकौ ॥ ५॥
दुर्मद, दुष्प्रगाह, विवित्सु, विकटानन, ऊर्णनाभ, सुनाभ, नन्द, उपनन्दक (२७-३४)
सेनापतिः सुषेणश्च कुण्डोदरमहोदरौ ।
चित्रबाणश्चित्रवर्मा सुवर्मा दुर्विमोचनः ॥ ६॥
सेनापति, सुषेण, कुण्डोदर, महोदर, चित्रबाण, चित्रवर्मा, सुवर्मा, दुर्विमोचन, (३५-४२)
अयोबाहुर्महाबाहुश्चित्राङ्गश्चित्रकुण्डलः ।
भीमवेगो भीमबलो बलाकी बलवर्धनः ॥ ७॥
अयोबाहु, महाबाहु, चित्राङ्ग, चित्रकुण्डल, भीमवेग, भीमबल, बलाकी, बलवर्धन, (४३-५०)
उग्रायुधो भीमकर्मा कनकायुर्दृढायुधः ।
दृढवर्मा दृढक्षत्रः सोमकीर्तिरनूदरः ॥ ८॥
उग्रयुध, भीमकर्मा, कनकायु, दृढायुध, दृढवर्मा, दृढक्षत्र, सोमकीर्ति, अनूदर, (५१-५८)
दृढसन्धो जरासन्धः सत्यसन्धः सदःसुवाक् ।
उग्रश्रवा अश्वसेनः सेनानीर्दुष्पराजयः ॥ ९॥
दृढसन्ध, जरासन्ध, सत्यसन्ध, सद:सुवाक्, उग्रश्रवा, अश्वसेन, सेनानी, दुष्पराजय, (५९-६६)
अपराजितः पण्डितको विशालाक्षो दुरावरः ।
दृढहस्तः सुहस्तश्च वातवेगसुवर्चसौ ॥ १०॥
अपराजित, पण्डितक, विशालाक्ष, दुरावर, दृढहस्त, सुहस्त, वातवेग, सुवर्चस, (६७-७४)
आदित्यकेतुर्बह्वाशी नागदन्तोग्रयायिनौ ।
कवची निषङ्गी पाशी च दण्डधारो धनुर्ग्रहः ॥ ११॥
आदित्यकेतु, बह्वाशी, नागदन्त, अग्रयायिन्, कवची, निषङ्गी, पाशी, दण्डधार, धनुर्ग्रह, (७५-८३)
उग्रो भीमरथो वीरो वीरबाहुरलोलुपः ।
अभयो रौद्रकर्मा च तथा दृढरथस्त्रयः ॥ १२॥
उग्र, भीमरथ, वीर, वीरबाहु, अलोलुप, अभय, रौद्रकर्मन्, दृढरथ, (८४-९१)
अनाधृष्यः कुण्डभेदी विरावी दीर्घलोचनः ।
दीर्घबाहुर्महाबाहुर्व्यूढोरुः कनकध्वजः ॥ १३॥
अनाधृष्य, कुण्डभेदी, विरावी, दीर्घलोचन, दीर्घबाहु, महाबाहु, व्यूढोरु, कनकध्वज, (९२-९९)
कुण्डाशी विरजाश्चैव दुःशला च शताधिका ।
एतदेकशतं राजन्कन्या चैका प्रकीर्तिता ॥ १४॥
कुण्डाशी, विरजस् (१००-१०१) आणि राजकन्या दु:शला.
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शंभर कौरवांची नावे

1. दुर्योधन 

2. दुःशासन 

3. दुःसह 

4. दुःशल 

5.जलसंघ 

6. सम 

7. सह 

8. विंद 

9. अनुविंद 

10.दुर्धर्

11. सुबाहु

 12. दुषप्रधर्ष 

13. दुर्मर्षण 

14.दुर्मुख 

15. दुष्कर्ण 

16. विकर्ण 

17. शल 

18.सत्वान

19. सुलोचन 

20. चित्र 

21. उपचित्र

 22.चित्राक्ष 

23. चारुचित्र

 24. शरासन

 25.दुर्मद 

26. दुर्विगाह

27. विवित्सु 

28. विकटानन्द 

29. ऊर्णनाभ

30. सुनाभ 

31. नन्द 

32. उपनन्द 

33.चित्रबाण

34. चित्रवर्मा 

35. सुवर्मा

36. दुर्विमोचन

37. अयोबाहु 

38. महाबाहु

39. चित्रांग 

40.चित्रकुण्डल

41. भीमवेग

 42. भीमबल 

43. बालाकि 

44.बलवर्धन 

45. उग्रायुध 

46. सुषेण 

47. कुण्डधर

48. महोदर 

49. चित्रायुध

50. निषंगी 

51. पाशी

52. वृन्दारक 

53.दृढ़वर्मा  

54. दृढ़क्षत्र 

55. सोमकीर्ति 

56.अनूदर

57. दढ़संघ 

58. जरासंघ 

59. सत्यसंघ 

60.सद्सुवाक

61. उग्रश्रवा 

62. उग्रसेन 

63.सेनानी 

64. दुष्पराजय

65. अपराजित 

66.कुण्डशायी 

67. विशालाक्ष 

68. दुराधर 

69.दृढ़हस्त 

70. सुहस्त 

71. वातवेग 

72. सुवर्च

73. आदित्यकेतु 

74. बह्वाशी 

75. नागदत्त

76. उग्रशायी 

77. कवचि 

78. क्रथन 

79.कुण्डी 

80. भीमविक्र 

81. धनुर्धर 

82.वीरबाहु 

83. अलोलुप 

84. अभय 

85. दृढ़कर्मा

86. दृढ़रथाश्रय 

87. अनाधृष्य

88. कुण्डभेदी 

89. विरवि 

90. चित्रकुण्डल

91. प्रधम 

92. अमाप्रमाथि 

93. दीर्घरोमा

94. सुवीर्यवान

95. दीर्घबाहु 

96. सुजात 

97. कनकध्वज 

98.कुण्डाशी 

99. विरज 

100. युयुत्सु


( या व्यतीरीक्त कौरवांना एक बहीण
होती तीचं नाव " दुशाला" )

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